तà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ वीर कहते हैं
तरà¥à¤œ: ये मेरा पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤ªà¤¤à¥à¤°...
तà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ वीर कहते हैं, और अतिवीर कहते हैं।
अनेकों नाम तेरे पर, अधिक महावीर कहते हैं ॥
अनंतो गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का तू धारी, तेरा यशगान हम गायें,
हे यà¥à¤— के नाथ निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾, तà¥à¤à¥‡ नत शीश नवायें,
दया होवे पà¥à¤°à¤à¥‚ à¤à¤¸à¥€, कि हम सब à¤à¤µ से पार हों,
à¤à¤µ से पार हों, à¤à¤µ से पार हों ॥ तà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ वीर …॥
यà¥à¤—ों से जीव यह मेरा, देह का योग है पाता,
मोह के जाल में फ़ंसकर, आतà¥à¤® निज और नहीं जाता,
पिला अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® रस सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€, जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की कà¥à¤·à¥à¤§à¤¾ धार हो,
कà¥à¤·à¥à¤§à¤¾ धार हो, कà¥à¤·à¥à¤§à¤¾ धार हो ॥ तà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ वीर …॥
सतà¥à¤¯ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤¨ हो मेरे, कि समà¥à¤¯à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ हो मेरे,
यही विनती मेरे सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€, रहूं चरणों में नित तेरे,
कà¤à¥€ फ़िर मोकà¥à¤· मिल जाà¤, कि वृदà¥à¤§à¤¿ सà¥à¤– अपार हो,
सà¥à¤– अपार हो, सà¥à¤– अपार हो ॥ तà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ वीर …॥