तेरी शीतल-शीतल मूरत

तेरी शीतल-शीतल मूरत

तर्ज: à¤¤à¥‡à¤°à¥€ प्यारी प्यारी सूरत को...

 

तेरी शीतल-शीतल मूरत लख

कहीं भी नजर ना जमें, à¤ªà¥à¤°à¤­à¥‚ शीतल

सूरत को निहारें पल पल तब

छबि दूजी नजर ना जमें! à¤ªà¥à¤°à¤­à¥‚ शीतल ॥

 

भव दु:ख दाह सही है घोर

कर्म बली पर चला न जोर

तुम मुख चन्द्र निहार मिली अब

परम शान्ति सुख शीतल ढोर

निज पर का ज्ञान जगे घट में भव बंधन भीड़ थमें ॥ प्रभू..

 

सकल ज्ञेय के ज्ञायक हो, à¤à¤• तुम्ही जग नायक हो

वीतराग सर्वज्ञ प्रभू तुम, à¤¨à¤¿à¤œ स्वरूप शिवदायक हो

`सौभाग्य' à¤¸à¤«à¤² हो नर जीवन, à¤—ति पंचम धाम धमे ॥ प्रभू ..