सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ ले अपने शीश, जगत के ईश गये गिरिराजा,
जा पाणà¥à¤¡à¥à¤•शिला विराजा ॥ सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿...॥
शिलà¥à¤ªà¥€ कà¥à¤¬à¥‡à¤° वहाठआकर के, कà¥à¤·à¥€à¤°à¥‹à¤¦à¤§à¤¿ मेरॠलगा करके,
रà¥à¤šà¤¿ पैढि ले आये, सागर का जल ताजा,
फ़िर नà¥à¤¹à¤µà¤¨ कियो जिनराजा ॥ सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿...॥
नीलम पनà¥à¤¨à¤¾ वैडà¥à¤°à¥à¤¯à¤®à¤£à¤¿, कलशा लेकर के देवगणि,
à¤à¤• सहस आठकलशा लेकर नà¤à¤°à¤¾à¤œà¤¾,
फ़िर नà¥à¤¹à¤µà¤¨ कियो जिनराजा ॥ सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿...॥
वसॠयोजन गहराई वाले, चउ योजन चौडाई वाले,
इक योजन मà¥à¤– के कलश ढरे जिनमाथा,
नहिं जरा डिगे शिशà¥à¤¨à¤¾à¤¥à¤¾ ॥ सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿...॥
सौधरà¥à¤® इनà¥à¤¦à¥à¤° अरॠईशान, पà¥à¤°à¤à¥ कलश करें धर यà¥à¤— पाना,
अरॠसनतà¥à¤•à¥à¤®à¤¾à¤° महेनà¥à¤¦à¥à¤° दोउ जिनराजा,
शिर चमर ढà¥à¤°à¤¾à¤µà¥‡à¤‚ साजा ॥ सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿...॥
à¤à¤°à¤¾à¤µà¤¤ पà¥à¤¨à¤¿ पà¥à¤°à¤à¥ लाकर के, माता की गोद बिठा करके,
अति अचरज ताणà¥à¤¡à¤µ नृतà¥à¤¯ कियो दिविराजा,
सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करके जिनराजा ॥ सà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿...॥