तेरे पांच हà¥à¤¯à¥‡ कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤à¥ इक बार मेरा कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ कर दे।
अंतरà¥à¤¯à¤¾à¤®à¥€ अंतरà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¤à¥ दूर मेरा अजà¥à¤žà¤¾à¤¨ कर दे॥
गरà¥à¤ समय में रतà¥à¤¨ जो बरसे, उनमें से à¤à¤• रतन नहीं चाहूं,
जनà¥à¤® समय कà¥à¤·à¥€à¤°à¥‹à¤¦à¤§à¤¿ से इनà¥à¤¦à¥à¤°à¥‹à¤‚ ने किया वो नà¥à¤¹à¤µà¤¨ नहीं चाहूं
मैं कà¥à¤¯à¤¾ चाहूं सà¥à¤¨à¤²à¥‡ २
जो चितà¥à¤¤ को निरà¥à¤®à¤² शांत करे वहीं गंधोदक मà¥à¤à¥‡ दान कर दे
धार दिगमà¥à¤¬à¤° वेश किया तप
तप कर विषय विकार को तà¥à¤¯à¤¾à¤—ा
सार नहीं संसार में कोई इसीलिये संसार को तà¥à¤¯à¤¾à¤—ा ॥
मैं कà¥à¤¯à¤¾ चाहूं सà¥à¤¨à¤²à¥‡ २
अपने लिये बरसों धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ किया मेरी ओर à¤à¥€ थोडा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ कर दे
केवलजà¥à¤žà¤¾à¤¨ की मिल गई जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ लोकालोक दिखाने वाली,
समवशरण में खिर गई वाणी सबकी समठमें आने वाली ॥
मैं कà¥à¤¯à¤¾ चाहूं सà¥à¤¨à¤²à¥‡ २
हे वीतराग सरà¥à¤µà¤œà¥à¤ž पà¥à¤°à¤à¥ मेà¤à¥‡ तेरा दरà¥à¤¶ आसान कर दे ॥
तीरà¥à¤¥à¤‚कर बनकर तू पà¥à¤°à¤—टा सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• थी मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ तेरी,
मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मà¥à¤à¤•ो दे तब देना à¤à¤µ à¤à¤µ की à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ तेरी ॥
मैं कà¥à¤¯à¤¾ चाहूं सà¥à¤¨à¤²à¥‡ २
निशदिन तेरे गà¥à¤£à¤—ान करूं बस इतना ही à¤à¤—वान कर दे ॥
यहां कौन है à¤à¤¸à¤¾ तेरे सिवा औरों को जो अपने समान कर दे॥