श्री अरहंत छबि लखि हिरदै

श्री अरहंत छबि लखि हिरदै

तर्ज: à¤¦à¥‡à¤–ो जी आदीश्‍वर...

श्री अरहंत छबि लखि हिरदै, à¤†à¤¨à¤¨à¥à¤¦ अनुपम छाया है ॥टेक॥

 

वीतराग मुद्रा हितकारी, à¤†à¤¸à¤¨ पद्म लगाया है

दृष्टि नासिका अग्रधार मनु, à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¨ महान बढ़ाया है ।१।

 

रूप सुधाकर अंजलि भरभर, à¤ªà¥€à¤µà¤¤ अति सुख पाया है

तारन-तरन जगत हितकारी,विरद सचीपति गाया है ।२।

 

तुम मुख-चन्द्र नयन के मारग, à¤¹à¤¿à¤°à¤¦à¥ˆ माहिं समाया है

भ्रमतम दु:ख आताप नस्यो सब, à¤¸à¥à¤–सागर बढ़ि आया है ।३

 

प्रकटी उर सन्तोष चन्द्रिका, à¤¨à¤¿à¤œ स्वरूप दर्शाया है

धन्य-धन्य तुम छवि `जिनेश्वर', à¤¦à¥‡à¤–त ही सुख पाया है ।४।