दिन-आयो दिन-आयो दिन-आयो

दिन-आयो दिन-आयो दिन-आयो,

आज जन्मकल्याणक दिन आयो ॥

 

झूमे आज नर-नारी ऐसे हरषाय,

म्हारो तन मनवा प्रभु के गुण गाये,

रंग-लाग्यो रंग-लाग्यो रंग-लाग्यो,

थारी भक्ति में म्हारो प्रभु रंग-लाग्यो ॥

 

तन भीगे मन भीगे, à¤­à¥€à¤—े मोरो आतम,

प्रभु ने बतायो आतम परमातम,

रंग-लाग्यो रंग-लाग्यो रंग-लाग्यो,

थारी भक्ति में म्हारो प्रभु रंग-लाग्यो ॥

 

सोलह सपने माँ ने देखे, à¤‰à¤¨à¤•ा फ़ल राजा से पूछा,

रानी तेरे गर्भ से पुत्र जन्म लेगा, à¤¤à¥€à¤¨ लोक का नाथ बनेगा,

हरषायो हरषायो हरषायो,

माता शिवा देवी को मन हरषायो ॥

 

सौरीपुर में जन्म हुआ है, à¤¤à¥€à¤¨ भुवन आनंद हुआ है,

इंद्र इंद्राणी मिल खुशियां मनावे, à¤®à¤‚गलकारी गीत सुनावें,

फ़ल पायो फ़ल पायो फ़ल पायो,

माता शिवादेवी ने शुभ फ़ल पायो ॥