चाह मà¥à¤à¥‡ है दरà¥à¤¶à¤¨ की
तरà¥à¤œ : पà¥à¤°à¤à¥ दरà¥à¤¶à¤¨ से जीवन की....
चाह मà¥à¤à¥‡ है दरà¥à¤¶à¤¨ की, पà¥à¤°à¤à¥ के चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¤¨ की ।।
वीतराग-छवि पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ है, जगजन को मनहारी है ।
मूरत मेरे à¤à¤—वन की, वीर के चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¤¨ की ।।
कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार किये, हाथ नहीं हथियार लिये ।
फौज à¤à¤—ाई करà¥à¤®à¤¨ की, पà¥à¤°à¤à¥ के चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¤¨ की ।।
समता पाठपढ़ाती है, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ की याद दिलाती है ।
नासादृषà¥à¤Ÿà¤¿ लखो इनकी, पà¥à¤°à¤à¥ के चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¤¨ की ।।
हाथ पे हाथ धरे à¤à¤¸à¥‡, करना कà¥à¤› न रहा जैसे ।
देख दशा पदà¥à¤®à¤¾à¤¸à¤¨ की, वीर के चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¤¨ की ।।
जो शिव-आननà¥à¤¦ चाहो तà¥à¤®, इन-सा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ लगाओ तà¥à¤® ।
विपत हरे à¤à¤µ-à¤à¤Ÿà¤•न की,पà¥à¤°à¤à¥ के चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¤¨ की ||